बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

पता नहीं क्या है?

चेहरा क्या है?
धोखा है,
और इस धोखे पे,
पूरी दुनिया फ़िदा है.

सबने ओढ़ रखे हैं,
चेहरों पर चेहरे,
असली चेहरा न जाने,
कहाँ छुपा है?

हर चेहरे पर,
दो नज़र गड़ी हैं,
इन नज़रों में भी,
गज़ब का धोखा है.

हर नज़र धोखे में हैं,
और हर चेहरा धोखा है.

3 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

waah .....bahut hi sundar bhav.

RaniVishal ने कहा…

Kya baat hai...bahut khub kahi,gahraai tak jakar socha hai!!
Aabhar
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बढिया !!