गुरुवार, 11 मार्च 2010

पता

जिनके पते पर हम मिला करते थे कभी,
अब वो खुदसे लापता हो गए हैं,
और कुछ इस तरह भी गुम हुए वो लोगों से,
कि अब उनके ख़त हमारे पते पर आते हैं...

3 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया.

shreya ने कहा…

jitne bhi aayein hain new wale address pe bhijwa dena btw nic 1...

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत खूब, लाजबाब !