शनिवार, 20 मार्च 2010

मछलियाँ

पिछले दो हफ्ते से,
aquarium का पानी,
मटमैला हो गया,
उसके पास,
पानी बदलने का,
वक़्त भी नहीं था,

क्योंकि,
ज़्यादातर,
वो मेरे साथ रहती थी,
अब तो,
मछलियों को भी,
मुझसे इर्ष्या होती है,
तभी तो,
मेरे हाथ से,
खाने का दाना तक,
नहीं खातीं..

4 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

देखिये मर न जाय बेचारी

संजय भास्कर ने कहा…

कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
बहुत सुन्दर रचना । आभार

ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Ankiy ने कहा…

sahi hai bandhu...ab aap jaisi cheez jisk saath ho toh machliyatoh naacheez lagegi na use


www.rjankit.blogspot.com

shreya ने कहा…

par jiske baare mein aap baat kar rahein hain sufi sahab unke haath so toh kha hi liya hoga,,chinta mat kariye..