हमारे सपनों को चुनौती देने का किसी को कोई हक़ नहीं है, अगर कोई ऐसा करता है तो शायद वो ख़ुद ज़िन्दगी से हारा हुआ है.
ज़िंदा होने का प्रमाण है बेचैनी, विचारों में उथल-पुथल की ज़िम्मेदार है बेचैनी, जीवन को गति देने का काम करती है बेचैनी, परिवर्तन को हवा देती है बेचैनी...
गुरुवार, 15 मई 2014
मंगलवार, 13 मई 2014
बुधवार, 16 अप्रैल 2014
फिर से बेचैनी...
पिछले चार साल से ये ब्लॉग ऐसे बंद पड़ी थी जैसे दिमाग़ का कोई हिस्सा। यादें होती तो शायद धुंधली पड़ जातीं लेकिन सारी चीज़ें जहाँ की तहाँ हैं, इसमें ताज्जुब की बात इसलिए नहीं है क्योंकि सब-कुछ तकनीक का कमाल है. अगर आपके मन में यह प्रश्न है कि आज इस ब्लॉग की याद कैसे आयी? तो इसका जवाब है "बेचैनी"। आज सुबह बाक़ी दिनों की अपेक्षा जल्दी ही जाग गया था, सोच रहा हूँ कि इसे आदत बना लूँ. फिर मन में आया कि एक ब्लॉग बनायी जाये जिसमें रोज़ सुबह कुछ पोस्ट किया जाए. नई ब्लॉग के लिए मनमाफ़िक नाम नहीं मिल रहा था.थोड़ी देर छटपटाता रहा, फिर देखा कि पुराने ब्लॉग लिस्ट में "बेचैनी" मौजूद है. इस ब्लॉग में मेरे व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी बहुत सी बातें पहले से हैं, पहले इन्हें हटाने का विचार आया किया लेकिन यह विचार बदल गया. सोचता हूँ कि लोग अपना व्यक्तिगत जीवन क्यों छिपाते हैं? ये उनका निजी मामला है इसलिए टिप्पणी नहीं करूँगा। जहाँ तक मेरी बात है तो मुझे अपने व्यक्तिगत जीवन को छुपाने में कोई रूचि नहीं है. इसलिए जो जैसा लिख दिया गया है, वो वैसा ही है. इस बार बेचैनी तो बहुत है, देखते हैँ इस बार ये कहाँ तक ले जाती है।
शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010
chakreshsurya.blogspot.com
देवियों और सज्जनों,
(जो जन इस पैराग्राफ को नहीं पढना चाहते, वे अंतिम वाला पढ़ें.)
"बेचैनी" को सराहने के लिये धन्यवाद, आप सभी ने इसके ज़रिये मेरे विचारों को पसंद किया इसके लिये भी मैं आपका आभारी हूँ. किन्तु "बेचैनी" का जो पता है वो मुझे काफी दूर पड़ जाता है इस वजह से मैं "बेचैनी" को स्थानांतरित करके अपने और समीप लेकर जा रहा हूँ जिसका नया पता होगा chakreshsurya.blogspot.com जी हाँ, एकदम मेरी नाम वाली तख्ती से सटकर. ताकि मैं जब भी हाथ बढ़ाऊं, कम से कम अपने घर के दरवाज़े तक तो पहुँच सकूँ. इस तरह से मैं नियमित रूप से इस चिट्ठे को संवारता रहूँगा. अतः आप सबसे अनुरोध है कि आप इस नए पते को सहेज लें और समय मिलने पर अवश्य पधारें.
"ये दुकान यहाँ से उठकर नए नाम से आगे चली गयी है, नया नाम है "chakreshsurya.blogspot.com"
(जो जन इस पैराग्राफ को नहीं पढना चाहते, वे अंतिम वाला पढ़ें.)
"बेचैनी" को सराहने के लिये धन्यवाद, आप सभी ने इसके ज़रिये मेरे विचारों को पसंद किया इसके लिये भी मैं आपका आभारी हूँ. किन्तु "बेचैनी" का जो पता है वो मुझे काफी दूर पड़ जाता है इस वजह से मैं "बेचैनी" को स्थानांतरित करके अपने और समीप लेकर जा रहा हूँ जिसका नया पता होगा chakreshsurya.blogspot.com जी हाँ, एकदम मेरी नाम वाली तख्ती से सटकर. ताकि मैं जब भी हाथ बढ़ाऊं, कम से कम अपने घर के दरवाज़े तक तो पहुँच सकूँ. इस तरह से मैं नियमित रूप से इस चिट्ठे को संवारता रहूँगा. अतः आप सबसे अनुरोध है कि आप इस नए पते को सहेज लें और समय मिलने पर अवश्य पधारें.
"ये दुकान यहाँ से उठकर नए नाम से आगे चली गयी है, नया नाम है "chakreshsurya.blogspot.com"
गुरुवार, 30 सितंबर 2010
अयोध्या का फैसला...
आज सोसाइटी के बच्चे, सुबह से खेल रहे हैं...
उन्हें लगता है कि ये छुट्टी का माहौल रोज क्यों नहीं रहता,
और बस्ती के बच्चों में खौफ है,
अगर दो-चार दिन ऐसा ही रहा,
तो दो वक्त की रोटी का इंतजाम कैसे होगा???
धर्म का नहीं...गरीबों की भूख का आज फैसला होगा,
यही कोई दोपहर में तीन-साढ़े तीन बजे.
(पुणे, महाराष्ट्र में अपने दोस्त के घर से)
उन्हें लगता है कि ये छुट्टी का माहौल रोज क्यों नहीं रहता,
और बस्ती के बच्चों में खौफ है,
अगर दो-चार दिन ऐसा ही रहा,
तो दो वक्त की रोटी का इंतजाम कैसे होगा???
धर्म का नहीं...गरीबों की भूख का आज फैसला होगा,
यही कोई दोपहर में तीन-साढ़े तीन बजे.
(पुणे, महाराष्ट्र में अपने दोस्त के घर से)
मंगलवार, 31 अगस्त 2010
Surya's Dil kee baat
सभी पाठकजनों को सूचित किया जाता है कि अब हम RJ (रेडिओ जौकी) नहीं हैं, कहने का मतलब है कि रेडियो पर बोलने का काम छोड़ दिया है. इसलिए ब्लॉग का शीर्षक भी बदल दिया है. अतः जो शीर्षक आपको दिखाई दे रहा है वो एकदम सत्य है, आपका दृष्टि भरम नहीं. व्यर्थ में किसी आँखों के चिकित्सक के पास जाकर उसकी कमाई में योगदान न दें.
धन्यवाद
चक्रेश सूर्या
फिलहाल अभी स्वतन्त्र लेखक, स्क्रिप्ट राइटर, कॉपी राइटर, क्रीएटिव राइटर और कॉन्सेप्ट विसुअलाइज़र हैं.
धन्यवाद
चक्रेश सूर्या
फिलहाल अभी स्वतन्त्र लेखक, स्क्रिप्ट राइटर, कॉपी राइटर, क्रीएटिव राइटर और कॉन्सेप्ट विसुअलाइज़र हैं.
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