माँ कहती है, आज अगर तुम होते तो 27 के होते,
और तुम्हारे जन्मदिन पर, आज शाम को खूब मस्ती करते.
पर! आज सुबह मैंने दीवार से तुम्हारी तस्वीर उतर कर,
उस पर फूलों की माला चढ़ाई, और माँ ने तिलक लगाया,
आज घर में खीर और सब्जी-पुड़ी बनी है,
माँ जानती है, तुम्हें क्या पसंद है...
Happy B'day Bhai...God bless u!
ज़िंदा होने का प्रमाण है बेचैनी, विचारों में उथल-पुथल की ज़िम्मेदार है बेचैनी, जीवन को गति देने का काम करती है बेचैनी, परिवर्तन को हवा देती है बेचैनी...
बुधवार, 30 जून 2010
सोमवार, 21 जून 2010
सोमवार, 7 जून 2010
मंगलवार, 25 मई 2010
पिछले दिनों इनमें व्यस्त था....
मेरा पहला रीमिक्स, रावण फिल्म से....
और कुछ ये भी....
इसे पैरौडी कह सकते हैं....
ये हमारे शहर के traffic signals के हालात..
ये भी बनाया था...
इसमें रानीताल Stadium की दुर्दशा की बारे में बताया गया है...
शनिवार, 20 मार्च 2010
मछलियाँ
पिछले दो हफ्ते से,
aquarium का पानी,
मटमैला हो गया,
उसके पास,
पानी बदलने का,
वक़्त भी नहीं था,
क्योंकि,
ज़्यादातर,
वो मेरे साथ रहती थी,
अब तो,
मछलियों को भी,
मुझसे इर्ष्या होती है,
तभी तो,
मेरे हाथ से,
खाने का दाना तक,
नहीं खातीं..
aquarium का पानी,
मटमैला हो गया,
उसके पास,
पानी बदलने का,
वक़्त भी नहीं था,
क्योंकि,
ज़्यादातर,
वो मेरे साथ रहती थी,
अब तो,
मछलियों को भी,
मुझसे इर्ष्या होती है,
तभी तो,
मेरे हाथ से,
खाने का दाना तक,
नहीं खातीं..
सोमवार, 15 मार्च 2010
प्रेरणा
सर्द रातों में,
जब तुम,
शॉवर के नीचे खड़ी होती हो,
तो पानी की बर्फ सी बूंदे,
पड़ती हैं तुम पर,
और फिर चिपक जाती हैं,
दीवारों से,
तुम्हारे दीदार के लिये,
पर तब तक तुम,
तौलिया लपेट कर,
बाहर आ जाती हो,
जहाँ मैं लैपटॉप लिये,
बैठा होता हूँ,
बर्फ बनकर...
जब तुम,
शॉवर के नीचे खड़ी होती हो,
तो पानी की बर्फ सी बूंदे,
पड़ती हैं तुम पर,
और फिर चिपक जाती हैं,
दीवारों से,
तुम्हारे दीदार के लिये,
पर तब तक तुम,
तौलिया लपेट कर,
बाहर आ जाती हो,
जहाँ मैं लैपटॉप लिये,
बैठा होता हूँ,
बर्फ बनकर...
गुमनाम रिश्ता
जिंदगी में बहुत रिश्ते देखे हैं,
बेटे का माँ-बाप से,
भाई का भाई-बहिन से,
दोस्ती का दोस्तों से,
प्रेमी का प्रेमिका से,
इन रिश्तों में,
जब कभी झगड़ा होता है,
तो रिश्तों के दरमियाँ,
लकीर खिंच जाती है,
लेकिन एक रिश्ता ऐसा भी,
देख रहा हूँ,
जहाँ,
तमाम झगड़ों के बावजूद,
न तो मैं लकीर खीच पाया,
न ही वो,
और ताज्जुब की बात ये है,
कि इस रिश्ते का कोई नाम नहीं...
बेटे का माँ-बाप से,
भाई का भाई-बहिन से,
दोस्ती का दोस्तों से,
प्रेमी का प्रेमिका से,
इन रिश्तों में,
जब कभी झगड़ा होता है,
तो रिश्तों के दरमियाँ,
लकीर खिंच जाती है,
लेकिन एक रिश्ता ऐसा भी,
देख रहा हूँ,
जहाँ,
तमाम झगड़ों के बावजूद,
न तो मैं लकीर खीच पाया,
न ही वो,
और ताज्जुब की बात ये है,
कि इस रिश्ते का कोई नाम नहीं...
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