सोमवार, 15 मार्च 2010

प्रेरणा

सर्द रातों में,
जब तुम,
शॉवर के नीचे खड़ी होती हो,
तो पानी की बर्फ सी बूंदे, 
पड़ती हैं तुम पर,
और फिर चिपक जाती हैं,
दीवारों से,
तुम्हारे दीदार के लिये,
पर तब तक तुम,
तौलिया लपेट कर,
बाहर आ जाती हो,
जहाँ मैं लैपटॉप लिये,
बैठा होता हूँ,
बर्फ बनकर...

 

4 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

भाव अच्छे हैं...

बेनामी ने कहा…

ahem ahem

Gautam RK ने कहा…

Good Lines...

Shreya ने कहा…

ahem ahem ahem...